देवास नगर निगम का शव वाहन नि:शुल्क, फिर भी वसूली जारी…?

₹500 और ₹1,000 लेने की शिकायतों से उठे सवाल, परिषद में प्रस्ताव पारित होने के बावजूद व्यवस्था पर सवालिया निशान
देवास। नगर निगम का शव वाहन शहरवासियों के लिए नि:शुल्क है। नगर निगम परिषद की बैठक में शव वाहन सेवा को नि:शुल्क करने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद शव वाहन चालक द्वारा लोगों से पैसे लिए जाने की शिकायत सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
15 अगस्त को प्रेस क्लब अध्यक्ष ललित शर्मा के अंतिम संस्कार के दौरान शव को मुक्तिधाम छोड़ने के बाद शव वाहन चालक द्वारा भाजपा नेता सुदर्शन दुबे से ₹500 लेने की बात सामने आई। सुदर्शन दुबे के अनुसार, कुछ दिन पहले भी शव वाहन चालक द्वारा ₹1,000 लिए जाने की घटना सामने आई थी।

महापौर पति ने वाहन शाखा से मांगी जानकारी
मामला सामने आने के बाद महापौर पति दुर्गेश अग्रवाल ने वाहन शाखा से जानकारी ली और शव वाहन के नि:शुल्क होने की पुष्टि कराई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित चालक के 7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। साथ ही शव वाहन पर स्पष्ट रूप से “शव वाहन नि:शुल्क” लिखवाने की बात कही गई।
परिषद का प्रस्ताव, फिर भी लोगों से वसूली क्यों?
जब नगर निगम परिषद में शव वाहन को नि:शुल्क करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि लोगों से ₹500 और ₹1,000 किस आधार पर लिए जा रहे थे?
यदि चालक को पैसे लेने की अनुमति नहीं थी, तो पहले सामने आई शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नगर निगम के पास शव वाहन के संचालन और निगरानी की कोई स्पष्ट व्यवस्था है?
एक और शव वाहन मिलेगा, उस पर भी लिखा जाएगा नि:शुल्क
महापौर पति दुर्गेश अग्रवाल ने बताया कि नगर निगम को जल्द ही एक और शव वाहन मिलने वाला है। उस पर भी स्पष्ट रूप से “शव वाहन नि:शुल्क” लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा सामने आने पर संबंधित के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच का सवाल
अब जरूरत इस बात की है कि नगर निगम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि नि:शुल्क शव वाहन के नाम पर पूर्व में कितने लोगों से राशि ली गई, किस आधार पर राशि ली गई और शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई।
मुख्य सवाल यही है—जब शव वाहन सेवा नि:शुल्क है, तो लोगों से ₹500 और ₹1,000 की वसूली कैसे और किसके निर्देश पर होती रही?
जनता को उम्मीद है कि नगर निगम मामले में पारदर्शिता बरतते हुए जिम्मेदारी तय करेगा और भविष्य में जरूरतमंद परिवारों को नि:शुल्क शव वाहन सेवा का लाभ बिना किसी अतिरिक्त राशि के मिलेगा।



























