देवास वादी द्वारा जिलाधीश व वन विभाग के विरुद्ध प्रस्तुत वाद न्यायालय ने किया खारिज,

देवास। शंकरगढ़ पाल नगर, देवास स्थित शंकरगढ़ पहाड़ी पर स्थित भूमि को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय जिला न्यायालय द्वारा किया गया है। मेसर्स आर. आर. स्टोन के संचालक रजनीश अग्रवाल द्वारा जिलाधीश व वन विभाग के विरुद्ध सिविल वाद क्रमांक 74A/2021 प्रस्तुत किया गया था, जिसमें उन्होंने न्यायालय से स्टे आदेश की मांग करते हुए उसके द्वारा किये निर्माण मै हस्तक्षेप न कर वृक्षा रोपण हेतु गढे खोदने कार्य को रोकने हेतु स्टे की मांग का निवेदन किया था। वाद में उल्लेख किया गया कि यह वादी की भूमि है जबकी वादी की भूमि शंकरगढ़ पहाड़ी पर स्थित है, व पहाड़ी से निचे पालनगर अन्तर्गत उसी क्षेत्र में 200 मीटर नीचे सर्वे नंबर 414 में वन विभाग की बेशकीमती भूमि स्थित है, जिस पर वृक्षारोपण किया गया है और निरंतर किया जा रहा है। वादी द्वारा उक्त वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण व खुदाई की कार्रवाई की गई थी, जिस पर वन अधिनियम के अंतर्गत रजनीश अग्रवाल के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया।
उल्लेखनीय है कि इस वाद में वन विभाग को प्रारंभ में पक्षकार नहीं बनाया गया था। बाद में सरकारी अभिभाषक श्री मनोज श्रीवास द्वारा माननीय न्यायालय से वन विभाग को पक्षकार बनाए जाने की अनुमति मांगी गई, जो स्वीकृत की गई। इसके उपरांत शासन की ओर से साक्ष्य व गवाहों के माध्यम से प्रभावी रूप से पक्ष प्रस्तुत किया गया। विद्वान न्यायाधीश श्रीमती किरण सिंह की न्यायालय ने समस्त दस्तावेजों व दोनों पक्षों के गवाहों के बयान का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए, वादी द्वारा प्रस्तुत वाद को खारिज कर दिया। न्यायालय के निर्णय से यह दर्शीत है कि वन विभाग की भूमि पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण को संरक्षित नही किया जा सकता है शासकीय अभिभाषक मनोज श्रीवास द्वारा शासन की ओर से प्रभावशाली पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने जिलाधीश एवं वन विभाग के पक्ष में निर्णय सुनाया। यह निर्णय वन भूमि की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।














