गरीब की थाली निगम में खाली भ्रष्ट अधिकारी प्रतिदिन 3 क्विंटल अनाज का कर रहे घपला,

देवास। (सैयद सादिक अली) देवास में दीनदयाल रसोई के नाम पर जारी भ्रष्टाचार में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। जिस दीनदयाल रसोई से गरीब, निराश्रित और भूखे को 5 रुपये में भोजन उपलब्ध होना था उसके स्थान पर अधिकारी अपनी झोली और जेब भरने में लगे हुए हैं। गरीब को मिलने वाली सस्ती थाली में भी अपना हिस्सा ढूंढने वाले अधिकारियों पर निगम कमिश्नर भी अंकुश लगाने में नाकामयाब रहे हैं।
वैसे तो दीनदयाल रसोई पर प्रति रसोई लगभग 300 रोटी बांट कर गेहूं चावल को खुले बाजार में बेचा जाता है। दीनदयाल रसोई के संचालक, चलित रसोई के ड्राइवर ने भी 300 रोटी बांटे जाने की बात स्वीकार की है। जब भी सूचना के अधिकार में जानकारी मांगने का प्रयास किया जाता है तो यहां के लोक सूचना अधिकारी और सिटी मैनेजर साफ बोलते हैं कि हम कोई जानकारी नहीं देते हैं। इस बार अपील करने पर जब अपीलीय अधिकारी ने 15 दिवस में जानकारी प्रदाय करने का आदेश किया तो भी वहां के सिटी मैनेजर विशाल जगताप ने अपील के निर्णय को मानने से इंकार किया और जानकारी देने से भी मना किया।
खाद्य विभाग ने किया खुलासा
जब इस मामले में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम से जानकारी प्राप्त की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई जिसमें यह पता चला कि जब तक देवास के स्थानीय ठेकेदार रसोई का संचालन कर रहे थे तो भ्रष्टाचार कम होता था। 2022, 2023 और 2024 तक सिर्फ 33 क्विंटल गेहूं और चावल से देवास की चारों रसोई छोटी मोटी कालाबाजारी के साथ चल रही थी लेकिन जैसे ही बाहरी और सेटिंगबाज ठेकेदार आये तो खाद्यान्न आवंटन को 3 गुना कर दिया गया।
कार्यालय कलेक्टर खाद्य जिला देवास द्वारा प्रदान दस्तावेज के आधार पर वर्तमान ठेकेदार प्रतिदिन 3 क्विंटल गेहूं चावल प्राप्त कर रहा है जबकि ग़रीबों को हमेशा रोटी खत्म होने का बोलकर भगा देता है और चलित रसोई का संचालन भी मात्र एक दो घंटे कर के गरीबों के हक़ पर डाका डालता है।
अब खास बात यह है कि अचानक खाद्यान कोटा बढ़ा कर 3 गुना आवंटन प्राप्त करने के बाद भी उच्च अधिकारियों द्वारा जांच न करना, सूचना के अधिकार और अपील के निर्णय के बाद भी जानकारी प्रदान न करने पर यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार सभी बड़े उच्च अधिकारी मिल कर गरीबों का अनाज खा कर गरीबों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
क्या आयुक्त महोदय इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा कर गरीबों की थाली में हो रहे भ्रष्टाचार को बंद कर पाएंगे या यूं ही गरीबों की थाली निगम करेगा खाली की तर्ज पर भ्रष्टाचार चलता रहेगा?



















