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कचरा प्लांट बना ज़हरीली गैस का स्रोत, गौवंश और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

देवास। हिन्दू युवावाहिनी के गौ प्रकोष्ठ द्वारा उठाए गए एक गंभीर मुद्दे ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। गौ प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दशरथ सिंह एवं पुष्पराज पटेल, तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुष्पा चौहान द्वारा हाल ही में इंदौर जिले की सांवेर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भांग्या स्थित कचरा प्लांट का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कचरा प्लांट परिसर में गायें खुले कचरे का सेवन कर रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस अमानवीय और अव्यवस्थित स्थिति को लेकर संगठन द्वारा संबंधित पंचायत और प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई गई। संगठन का आरोप है कि लेकिन मुद्दे के समाधान के बजाय, निरीक्षण के अगले ही दिन पंचायत द्वारा पूरे कचरे में आग लगा दी गई। कचरा जलाने से निकली ज़हरीली और हानिकारक गैसों ने आसपास के रहवासियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और बच्चों व बुजुर्गों की तबीयत बिगडऩे जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कचरा जलाने से निकलने वाला यह जहरीला धुआं आसपास विचरण करने वाली गौ माताओं के लिए भी अत्यंत घातक साबित हो रहा है। गौवंश न केवल प्रदूषित वातावरण में सांस लेने को मजबूर हैं, बल्कि पहले से ही कचरे के सेवन के कारण बीमारियों की चपेट में हैं। ग्रामीणों और हिन्दू युवावाहिनी के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन और शासन इस गंभीर समस्या की ओर आंखें मूंदे बैठा है। न तो कचरे के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था की गई है और न ही गौवंश की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं। संगठन ने मांग की है कि कचरा प्लांट को तत्काल वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जाए। गौवंश के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाई जाए। कचरा जलाने जैसी अवैध प्रक्रिया पर सख्त कार्रवाई हो। प्रभावित ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाए।संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दशरथ सिंह जाट ने कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो हिन्दू युवावाहिनी द्वारा उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। यह मामला न केवल पर्यावरण और जनस्वास्थ्य का है, बल्कि गौ संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

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