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देवास के नागूखेड़ी में डेयरी प्लांट का पानी जांच में निकला दूषित, संचालन पर लगेगा ताला!

देवास। शहर से सटे ग्राम पंचायत नागूखेड़ी के कमलानगर क्षेत्र में संचालित एक डेयरी प्लांट से निकल रहा पानी जांच में दूषित पाया गया है। शिकायत मिलने के बाद मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और जल का नमूना जांच के लिए भेजा। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि परिसर के बाहर छोड़ा जा रहा जल निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषित है।
मशीन धुलाई का पानी बना मुसीबत-
निरीक्षण के दौरान प्लांट में दूध चिलिंग का कार्य जारी था। कर्मचारी मशीनों और फर्श की धुलाई कर रहे थे, जिसका दूषित पानी नाली के माध्यम से पीछे खुली भूमि में एकत्रित हो रहा था। आसपास के भू-स्वामी ने इसे पर्यावरण और कृषि भूमि के लिए खतरा बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

प्रयोगशाला रिपोर्ट में खुलासा-
क्षेत्रीय प्रयोगशाला, उज्जैन में हुई जांच में जल के पैरामीटर तय सीमा से अधिक पाए गए। इतना ही नहीं, प्लांट द्वारा स्थापना और संचालन के लिए बोर्ड से अनिवार्य सम्मति भी प्राप्त नहीं की गई थी। यानी प्लांट कथित रूप से अवैध रूप से संचालित पाया गया।

अब क्या होगा?
क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. दीपक काले के निर्देश पर संबंधित संचालक मेसर्स पंकज तेजवानी डेयरी प्लांट को नोटिस जारी किया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि—
उत्पादन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से बंद की जा सकती है।
बिजली, जल प्रदाय सहित अन्य सेवाओं का विच्छेदन प्रस्तावित है।
उद्योग के विरुद्ध न्यायालयीन कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी।
यह कार्रवाई जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 33-क तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31-क के तहत प्रस्तावित है। संचालक को 15 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

जमीन कब्जे का विवाद भी गर्म-
शिकायतकर्ता तेजस्वी शर्मा ने प्लांट द्वारा कुछ भूमि पर कब्जे का आरोप भी लगाया है। यह मामला फिलहाल तहसील न्यायालय में विचाराधीन है।
पर्यावरण बनाम उद्योग की यह जंग अब निर्णायक मोड़ पर है। सवाल यह है कि क्या डेयरी प्लांट नियमों का पालन कर संचालन जारी रख पाएगा, या फिर प्रशासन की सख्ती से उस पर ताला लगेगा?

“कार्रवाई की जा चुकी है और संबंधित पक्ष को जवाब देने का समय दिया गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. दीपक काले, क्षेत्रीय अधिकारी, उज्जैन।

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