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कलवार घाट पर देर रात बड़ा हादसा, पुलिस का त्वरित रेस्क्यू
• ट्राला पलटने से फंसे 04 लोगों को सुरक्षित निकाला गया,

संक्षिप्त विवरणः- दिनांक 21.01.2026 की देर रात लगभग 03:00 बजे डायल-112 कंट्रोल रूम से सूचना प्राप्त हुई कि एक ट्राला जिसमें लोहे की भारी गार्डर/प्लेटें लदी हुई थीं, कलवार घाट पर अनियंत्रित होकर पलट गया है। दुर्घटना में ट्राले के केबिन में चार व्यक्ति बुरी तरह फंस गए हैं। सूचना की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक देवास श्री पुनीत गेहलोद द्वारा तत्काल रेस्क्यु की कार्यवाही के निर्देश दिये गये । जिस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्रीमती सौम्या जैन एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस)कन्नौद श्री आदित्य तिवारी के निर्देशन में थाना प्रभारी कन्नौद निरीक्षक तहजीब काजी के नेतृतव मे पुलिस टीम का गठन कर मौके पर पहुंचकर स्थानीय नागरिकों के सहयोग एवं उपलब्ध संसाधनों की सहायता से तत्काल रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। कड़ी मशक्कत के पश्चात ट्राले में फंसे चारों व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालकर डायल-112 के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कन्नौद पहुंचाया गया, जहाँ चिकित्सकों की टीम द्वारा घायलों का तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया। घायल गोविन्द पिता रामौतार निवासी पानी की टंकी के पास हरदा से पूछताछ पर ज्ञात हुआ कि उसका छोटा भाई कान्हा उर्फ सुनील विगत सात माह से लापता था, जिसकी तलाश में वह अपने भाई अनिल के साथ इंदौर गया था। भाई के मिलने के पश्चात तीनों इंदौर से हरदा लौट रहे थे। रास्ते में हरदा जाने हेतु उक्त ट्राले में लिफ्ट लेकर बैठे थे। इसी दौरान रात्रि लगभग 03:00 बजे वाहन चालक की लापरवाही के कारण कलवार घाट पर ट्राले का संतुलन बिगड़ गया और ट्राला पलट गया। ट्राले में लदी भारी लोहे की प्लेटें केबिन से टकराकर उनके ऊपर गिर गईं, जिससे गोविन्द,अनिल, कान्हा उर्फ सुनील एवं चालक मनीष घायल होकर वाहन में फंस गए।दुर्घटना में वाहन चालक मनीष पिता रामलाल निवासी शिकुरवा जिला सीधी के सिर में गंभीर चोट लगने से सीएचसी कन्नौद में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। वहीं घायल गोविन्द, अनिल एवं कान्हा उर्फ सुनील को प्राथमिक उपचार उपरांत बेहतर उपचार हेतु इंदौर रेफर किया गया।

सराहनीय कार्यः-उक्त रेस्क्यू कार्य में निरीक्षक तहजीब काजी,सउनि गणेश विश्नोई,मोहनलाल पंवार,आरक्षक महेश पोरवाल,राजेंद्र सिंह,देवेंद्र सिंह,गौरव पटेल,शैलेन्द्र करमोदिया तथा डायल-112 पायलट वीरेंद्र सिंह का सराहनीय योगदान रहा।

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